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तू चाल पुढं, तुला र गड्या भीती कशाची

१६ जून २०२० मुंबई  तू चाल पुढं, तुला र गड्या भीती कशाची 3 जून ला कोकण किनारपट्टीवर "निसर्ग" नावाचे चक्रीवादळ आदळले. सुमारे 100-120 किमीच्या वेगाने वारा, पाऊस आणि ढग यांचे मिश्रण असलेले हे चक्रीवादळ रायगड, रत्नागिरी जिल्ह्यात थैमान घालून पुढे  गेले. अन्य जिल्ह्यात सुद्धा नुकसान झाले. सुपारी/पोफळी, नारळ, काजू, आंबा, कोकम इत्यादी, लागवडीच्या बागा/वाड्या जमीन दोस्त झाल्यात. जी झाडे सध्या उभी आहेत ती चांगली आहेत का, किंवा किती दिवस उभी राहतील याची काही शाश्वती नाही. बर्‍याच ठिकाणी मोठी झाडे आंबे, फणस सुद्धा उन्मळून पडली. एक झाड कापून न्यायचे, दोन हजार. छोट्या वाडय़ांमध्ये सरासरी पन्नास ते साठ झाडे असतात. म्हणजे एक दीड लाख रुपये खर्च फक्त झाडे तोडून, जागा साफ करून घेण्यासाठी. बर्‍याच ठिकाणी अजून नियमित वीज पुरवठा नाही. एरवी चारशे पाचशे रुपयांचा पत्रा आठशे नऊशे ला विकला जातोय. लावायला लागणारी माणसे कमी, कामे जास्त. कौलारू घरासाठी लागणारे कौलं सुद्धा अव्वाच्या-सव्वा भावात विकले जात आहेत. त्यात आता पुन्हा, समोर मॉन्सून उभा ठाकलेला. म्हणजे पुढच्या तीन चार महिन्या...

ये लाल रंग....

14 Jun 20, मुंबई ये लाल रंग. ... कल, 13 जून को, हमारे पड़ोसी देश नेपाल मे, वहा की विद्यमान सरकार ने एक नए राजनयिक नक्शे का प्रस्ताव अपनी संसद मे मंजूर करवा लिया है. अब इसे वहा के राष्ट्रपति के सहमती की जरूरी है. इस नक़्शे में लिम्पियाधुरा कालापानी और लिपुलेख जैसे रणनीतिक क्षेत्र को नेपाल की सीमा का हिस्सा दिखाया गया है. नेपाल और भारत करीबन 1880 किलोमीटर की खुली सीमा साझा करते है. कहते है, इसमे मे 98 % भूभाग पर कभी कोई विवाद नहीं था. लेकिन लिम्पियाधुरा कालापानी और लिपुलेख के लिए नेपाल हमेशा से आग्रही रहा है. कहा जा रहा है कि, हमारा दूसरा पड़ोसी देश, चीन इस विषय मे मध्यस्थि करने के लिए उत्सुक है.  .......... लद्दाख मे भारतीय सेना और चीन की पीपल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के बीच बीते कुछ हफ्तों से संघर्ष शुरू था. कुछ दिन पहले PLA, ढाई किलोमिटर पीछे हटी. बातचीत शुरू है.  कुछ दिनों पहले, पूर्वोत्तर मे सिक्किम से सटे नाकुला पास पर भारतीय सेना और चीन के जवानों मे भिड़ंत हो गई.  करीबन तीन साल, पहले भारतीय सेना का चीनी सेना के साथ, भारत, चीन और भूटान की स...

गाडी बुला रही है....

13 जून 20, मुंबई गाडी बुला रही है.. .. कोरोना वैश्विक महामारी की वजह से मे पूरी दुनिया मे हाहा कार मचा है. लॉकडाऊन की वजह से विमान यात्री सेवा, कुछ जगहों पर बस सेवा ठप्प हो गई है. यात्री रेल सेवाएं भी पहले तीन चरण में काफी हदतक बंद ही थी. दूसरे राज्यों मे कामधंदे की वजह से अटके हुए प्रवासी भारतीयों के अपने गांव जाने के लिए श्रमिक ट्रेन्स शुरू की गई. एक मई से चार जून तक चार हजार दो सौ से ज्यादा श्रमिक ट्रेन चलाई गई है, जिससे करीबन 58 लाख प्रवासियों को अपने गाव मे जाना मुमकिन हुआ. भारतीय रेल्वे पहले से ही अपनी कार्यक्षमता के लिए जानी जाती है. लेकिन इस कठिन दौर मे भारतीय रेल्वेने (रेल मंत्रालय के साथ, भारतीय रेल्वे उनके सभी अधिकारी, चालक दल, टेक्निकल स्टाफ और रखरखाव करने वाले कर्मचारी) एक परिवार जैसे काम किया. इसमे काफी जद्दोजहद करनी पडी होंगी, विशेषकर जब ईन ट्रेनों की आवाजाही दो चार राज्यों की तरफ अधिक थी. तब इनका पथ संचालन काफी कठिन हुआ होंगा. कई बार मार्ग मे बदल करने पडे होंगे ताकि लोग जल्दी अपने गंतव्य स्थान पर पहुच सके.  जब कोरोना का फैलाव शुरू ...